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दोस्तों के नाम :-)

आसमान की डाल से एक मीठा सितारा पक कर गिरा था. बंद आँखों से.. ख्यालों के पैरों पर उसे पकड़ने को मैं दौड़ा था. दुआ के हाथों से जब उसे उठाया था.. तब मैंने तुम्हे पाया था.. जब राह अंतहीन थी.. और साथी कोई ना था, तकलीफों की तपती राह पर उम्मीदों के पाँव जलने लगे थे. बोझिल आँखों से मैंने अपने लिए भी एक फ़रिश्ते को बुलाया था. तब मैंने तुम्हे पाया था.. कहते हैं दोस्त इंसान नहीं एक आदत होते हैं, आदत.. जिनपर आपका कोई ज़ोर नहीं होता.. जब आदतों से जुड़ने का मेरा भी मौका आया था. तब मैंने तुम्हे पाया था.

Death of the Joker

मैं मुखौटे में छुपा था.. मुखौटे में ही रह गया.. ना मेरे होने की कोई ख़बर थी, ना मेरे ना-होने की कोई ख़बर है.. जो जानता था मुझको, उसने किसी को बताया नही.. फ़िर कोई मुझे जानता नही, तो किसी ने मुझे अपनाया नही.. मैं तनहा ही था .. और अब तनहा ही नही - हूँ .. मैं जोकर ही था.. मर कर भी वही हूँ.. दूसरों के चेहरे पर हसी मुझे अब भी भाति है.. कभी कभार हिचकियाँ मुझे भी आती हैं.. देखने जाता हूँ कभी अपने कपडों में किसी और को.. सुनता हूँ लोग कहते हैं "पहले वाला ज़्यादा अच्छा था। " उनकी यह मायूसी अब भी मुझसे खलती है. जाता हूँ दौड़ कर स्टेज पर और कुछ नया कर दिखाता हूँ.. अब बिना मुखौटे के भी मुझे कोई देख नही सकता। मैं पहले भी अनदेखा था ... मर कर भी वही हूँ । एक चेहरा मुझे याद है.. अब भी उसे दूर से देखने भर को जाता हूँ.. उसके चेहरे पर हँसी अब भी सबसे खूबसूरत लगती है. उसका वो बचपन अब भी है, वो शरारत अब भी है.. पता नहीं उसको मैं याद हूँ या नहीं.. पर मेरे जेहन मे वो अब भी है.. शायद वो कभी सोचती होगी कि मैं कहीं हँस रहा हूँगा, उसे शायद वो कागज़ पर रंगों से बनी मुस्कराहट असली...

जोकर

मैं एक जोकर हूँ। कब ख़ुद के लिए हँसा था, ये याद नही, पर दूसरो के लिए हर पल मैं हँसता हूँ.. दिलों मे तो जगह नही मिलती, पर मैं लोगो के छोटे से वक्त मे बसता हूँ.. ना मेरा कोई दिल है, ना दिल की बात है। ना मुझे कोई आस है, ना मेरी कोई फरियाद है॥ शक्लों को पसंद करने वाली दुनिया मे नही मेरी कोई औकात है.. हाँ बिना शक्ल का.. हँसते मुखौटे के पीछे छुपा मैं एक जोकर हूँ॥ जब इंसानों ने ठुकराया तो कुदरत को दोस्त बनाया, जब कुदरत ने भी ठुकराया तो हँसी को दोस्त बनाया। अपनी छोटी सी खुशी मे और अपने ग़मों पर भी मैं हँसता हूँ.. देखने वालो को मैं हमेशा ही खुश दिखता हूँ। हँसते होठो के बीच मेरे दर्द पर भीगी आँखे ढूंढ़ता हूँ.. मैं एक जोकर हूँ॥ वक्त की बंदिशों मे सब मेरे साथ हँसते रहते हैं, उस वक्त के बाद सिर्फ़ सन्नाटे ही मुझसे कुछ कहते हैं। जब कोई देखता, मैं सिर्फ़ हँसता होता था, कोई नहीं जानता कि सबसे छुपकर मैं कितना रोता था. भगवान भी पत्थरो में छुपकर मुस्कुरा कर मुझे अनसुना कर देता है। मैं... एक जोकर हूँ। २७-०१-२००९ (बंगलौर)

फ्रेंडशिप डे (इवेनिंग)

आसमां लाल सा है, और सूरज अब तक डूबा नही है । ठंडी हवा चल रही है , और खम्बों पर लगी बत्तिया माहौल खुशनुमा कर रही है । टहलते हुए दोस्तों की टोलियाँ बहुत खुश नज़र आती है । पर मैं अकेला उदास खड़ा हूँ । सामने बैठे बच्चे मासूमियत से मुस्कुरा रहे हैं । उनके होठो पर बैठी मुस्कराहट से तुम्हारी याद आई । कहीं तुमने ही तो उस हसीं मे दोस्ती का तोहफा नही भेजा ? सुना है आजकल तुमने कोई नया हुनर सीखा है॥ उस हसी से तुम्हारी खुशी का एहसास तो हो गया मुझको , पर मैं अब भी अकेला उदास खड़ा हूँ । जब तुम्हारी याद बर्दाश्त न हुई तो घुस चला एक किताबो की दूकान मे । कुछ किताबो पर नज़र गई जो हमने कभी साथ पढ़ी थी , और मेरे होठो पे हसी के साथ आखो से एक आंसू छलक गया। निकला वहां से बाहर और सड़क की भीड़ मे खो गया जब रुका और पलट कर देखा तो पाया.. मैं अब भी अकेला उदास खड़ा हु । ०४-०८-०८ (फ्रेंडशिप डे की शाम)

दोस्ती

कुछ कागजों की उथल -पुथल से आँख खुली। देखा तो एक पुरानी लिखी अधूरी कविता ऊपर आना चाहती है । कभी लिखा था अपने दोस्तों के बारे मे, और जब लब्ज़ कम पड़ गए तो छोड़ दिया था उसे वहीँ। मेरी बाकी लिखी कविताओ की तरफ़ इशारा करके कहती है कि मैं उसे पूरा करूँ। जानता हूँ बहुत बोलता हु मैं , पर दोस्ती को बयां कर सके , वो लब्ज़ अब तक बने नहीं । हर बार गले मिलने पर खुश दिल का बोलना , हर दिन खुश होने पर पीठ ठोकना , वो हर शाम को चाय की चुस्कियां , वो जश्न मे टकराती बोतलों की आवाज़ , जो बयान कर सके इन आवाजो को कहाँ से लाऊं वो अल्फाज़ । माफ़ी मांग कर उस कविता को फ़िर एक बार सहेज कर रख दिया । और फ़िर सोचा कि आज कैसे इन कागजों मे जान आ गई ॥ देखा सामने की खिड़की खुल पड़ी है । और आज.. फ़िर घर मे दोस्ती की हवाएँ आई है । ०४-०८-२००८ ( फ्रेंडशिप डे की सुबह)

दास्ताँ - ऐ - जाम

क्या कहें ऐ साकी कब से पीना शुरू किया जब मौत ने बुलावा भेजा तब से जीना शुरू किया । ज़िंदगी बीत गई काम करते हुए कहता है वक्त अब जाम भरते हुए ज़िंदगी भर के ज़ख्म अब सीने से झांकते है हर जाम के साथ चाक-ऐ -जिगर सीना शुरू किया। उसको ज़िंदगी मे आते देखकर हाथ रुक गया था उसके हुस्न के आगे यह जाम झुक गया था आंखो के नशे को जाम मे समेटता रहा उसे जाते देखकर फ़िर पीना शुरू किया ११/०३/०८

Letter from heaven

याद है मुझे दोस्त .... तुमने कहा था सब ठीक हो जाएगा । जब-जब मैं परेशान होता था, तुम यही कहा करते थे । चाहे पढ़ाई, दोस्ती या प्यार हो, तुमने यही कहा था और.. सच मे आख़िर मे सब ठीक हो जाता था। कल पूना मे मज़हबी दंगे हुए थे । किसी तलवार ने चीर दिया था मेरा सीना, बहुत दर्द हुआ था .... मेरे सामने पड़े मेरे जिस्म पर घाव अब भी है । पर जाने क्यों दर्द महसूस नहीं होता। याद है मुझे दोस्त तुमने कहा था... सब ठीक हो जाएगा। "मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ मेरे दोस्त " १५/02 /08