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Letter from heaven

याद है मुझे दोस्त .... तुमने कहा था
सब ठीक हो जाएगा ।

जब-जब मैं परेशान होता था, तुम यही कहा करते थे ।
चाहे पढ़ाई, दोस्ती या प्यार हो, तुमने यही कहा था
और.. सच मे आख़िर मे सब ठीक हो जाता था।

कल पूना मे मज़हबी दंगे हुए थे ।
किसी तलवार ने चीर दिया था मेरा सीना,
बहुत दर्द हुआ था ....
मेरे सामने पड़े मेरे जिस्म पर घाव अब भी है ।
पर जाने क्यों दर्द महसूस नहीं होता।

याद है मुझे दोस्त तुमने कहा था...
सब ठीक हो जाएगा।
"मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ मेरे दोस्त "

१५/02/08

Comments

sahi kaha me bilkul thik hun...apka blog dkhe kar sach bahut acha lag raha hai har poem padke

sache se ahsaas se bhari har kavita dil tak jati hai

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