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दास्ताँ - ऐ - जाम

क्या कहें ऐ साकी कब से पीना शुरू किया जब मौत ने बुलावा भेजा तब से जीना शुरू किया । ज़िंदगी बीत गई काम करते हुए कहता है वक्त अब जाम भरते हुए ज़िंदगी भर के ज़ख्म अब सीने से झांकते है हर जाम के साथ चाक-ऐ -जिगर सीना शुरू किया। उसको ज़िंदगी मे आते देखकर हाथ रुक गया था उसके हुस्न के आगे यह जाम झुक गया था आंखो के नशे को जाम मे समेटता रहा उसे जाते देखकर फ़िर पीना शुरू किया ११/०३/०८

Letter from heaven

याद है मुझे दोस्त .... तुमने कहा था सब ठीक हो जाएगा । जब-जब मैं परेशान होता था, तुम यही कहा करते थे । चाहे पढ़ाई, दोस्ती या प्यार हो, तुमने यही कहा था और.. सच मे आख़िर मे सब ठीक हो जाता था। कल पूना मे मज़हबी दंगे हुए थे । किसी तलवार ने चीर दिया था मेरा सीना, बहुत दर्द हुआ था .... मेरे सामने पड़े मेरे जिस्म पर घाव अब भी है । पर जाने क्यों दर्द महसूस नहीं होता। याद है मुझे दोस्त तुमने कहा था... सब ठीक हो जाएगा। "मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ मेरे दोस्त " १५/02 /08

चाँद

बचपन से मैं और मेरा दोस्त शब मे जागते रहे हैं। हममें फर्क सिर्फ़ इतना था कि उसके आस-पास बहुत दोस्त थे और मैं अकेला रहता था। उसे अपने दोस्तो को छोड़कर मुझसे खेलना पसंद था। वह मुझसे बहुत दूर रहता था और हम कभी बात भी नही कर पाते थे। वह मुह बना बना कर मुझसे बात किया करता था। बचपन मे हर तीस्वे दिन वो अपने गालों मे मिठाई भरकर अपना चेहरा गोल कर लेता था । और इस खेल के ठीक बीचों- बीच रात को वह छुप जाता और मुझे ढूंढने को कहता। उस दिन मैं उसे ढूंढ नही पाता था । अगले ही दिन जैसे जान बूझ कर वह अपनी सफ़ेद कमीज़ के किनारे दिखा देता, और मैं उसे ढूंढ कर खुश हो जाता । फ़िर पढ़ाई और नौकरी कि भागमभाग मे मैंने उसे लंबे अरसे तक नही देखा। मैं अब बड़ा हो गया हूँ .... पर वो अब भी बच्चा ही है। वो शायद अब भी मुझे नही भूला है ... वो आज भी मेरा दोस्त है। आज भी उसका वही खेल चला आ रहा है। जब कई दिन मैं उसके साथ जाग नही पाता ... वो सोचता होगा की मैं छुप गया हूँ ....... और मुझे ढूँढता होगा। आज शब फ़िर मैं और मेरा दोस्त जाग रहे हैं। आज भी उसके आस-पास बहुत दोस्त है... आज फ़िर मैं अकेला हूँ। १८/०२/08